एक गरीब युवक किसी तरह भोजन जुटाता था पर एक चूहा उसका भोजन चुरा लेता था। उसने सोचा कि इस चूहे को भी मैं गरीब ही मिला। 1 दिन वह भगवान बुद्ध के पास यह पूछने के लिए चल पड़ा कि आखिर वह क्या करें कि उसका भाग्य बदल जाए? बुद्ध तक पहुंचने का रास्ता बहुत कठिन था। रास्ते में उसने एक सेठ के घर में आश्रय लिया। सेठ की पत्नी ने जब उसकी यात्रा का उद्देश्य जाना तो उसने कहा कि बुद्ध से हमारी बोलने में असमर्थ बेटी के बारे में भी पूछ लेना कि उसकी आवाज कैसे लौटेगी।उसने कहा कि उसका सवाल जरुर पूछेगा।जब वह आगे बढ़ा तो उसे बर्फ का पहाड़ और एक साधु मिला। साधु ने कहा कि भगवान से पूछ लेना कि 100 साल की तपस्या के बाद अब मैं क्या करूं कि जिससे स्वर्ग जा सकूं। लड़के ने उसको भरोसा दिया कि उसका सवाल जरुर पूछेगा। साधु ने अपनी जादुई छड़ी से उसे बर्फ के पहाड़ के पार पहुंचा दिया। आगे बढ़ा तो एक विशाल नदी थी। वहां उसे बोलने वाला कछुआ मिला। उसने युवक से कहा कि वह भगवान बुद्ध से पूछे कि 500 साल से ड्रैगन बनने की कोशिश कर रहा है। ऐसा क्या करें कि ड्रैगन बन जाए? उसके हां कहने पर कछुए ने उसे नदी पार करा दी। युवक किसी तरह बुद्ध के पास पहुंचा तो उन्होंने उससे कहा कि वह सिर्फ तीन ही सवाल पूछ सकता है। युवक सोचने लगा कि वह किस का सवाल छोड़ें। जब उसने विचार किया तो उसे लगा की मूक, लड़की 100 साल से तपस्या कर रहे साधु और 500 साल से इंतजार कर रहे कछुए के सवाल अधिक महत्वपूर्ण है। मैं तो जिंदगी काट ही लूंगा । बुद्ध ने उसे तीनों सवालों के जवाब दे दिए। उसे सबसे पहले कछुआ मिला युवक ने कहा कि वह कवच का त्याग करेगा तो ड्रैगन बन सकेगा। कवच उतार कर वह ड्रैगन बन गया। कवच में मोती थे, जो कछुए ने युवक को दे दिए। उसने साधु से कहा कि वह जादुई झड़ी का मोह छोड़ दे। साधु ने छड़ी युवक को दे दी और स्वर्ग चला गया चला गया। युवक ने सेठ के यहां पहुंचकर बताया कि युवती की शादी होते ही उसकी अवाज लौट आएगी।सेठ अपनी पुत्री की शादी उस युवक से कर दी।
सीख : हम दूसरों के लिए कुछ करते हैं तो उनका भी सहयोग हमें मिलता है। जब लोगों के लिए त्याग करते हैं तो हमारी तरक्की की राह खुलती है।
Nice
ReplyDeleteBhut sunder 👌🏻👌🏻
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